पंजाब का किसान आंदोलन क्यों कर रहा है?

आंदोलनकारी किसानों को इस मिट्टी का किसान मत कहिए क्योंकि वह भूखा रहकर दूसरों को खिलाता था इसलिए उसे अन्नदाता कहा जाता था किंतु आज आंदोलन के नाम पर किसान खुद पेल कर खा रहा है। और दूसरों के खाने लायक अनाज को रोक रहा है। क्योंकि किसान बदल गया है।


हरियाणा पंजाब के किसानों को अन्नदाता बिल्कुल भी नहीं कह सकता क्योंकि वहां के किसान इतने अधिक लालची हैं जिसे सिर्फ लालची की संज्ञा देना उचित होगा क्योंकि वह अपने खेत में अधिक लालचवस रसायनों का अधिक उपयोग कर फसल के रूप में जहर काट रहा है जिससे कैंसर, मधुमेह, अल्सर, मोटापा, अस्थमा आदि रोगों को पूरे देश में भेज रहा है। इसलिए इस आंदोलन से पूरे भारत का किसान दूरी बनाकर रख रहा है। क्योंकि पूरे भारत का किसान हमारे स्वास्थ्य को अच्छी तरह समझता है।


पंजाब का किसान राष्ट्र की प्रगति पथ पर रोडे़ अटका रहा है।
राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है जब हम व्यापार द्वारा विदेश से पैसा लाएं।
कांग्रेस विचारधारा ने पिछले 70 वर्षों से अपनी साजिश के तहत भारत को पंगु बनाकर रखा है।
1-आरक्षण-जिसके तहत शिक्षा को पंगु बनाया गया है। जिसके परिणाम स्वरूप भारत का व्यक्ति विदेश में जल्द सफल नहीं होता। होता वही है जिसे आरक्षण की उम्मीद नहीं रहती। तथा आरक्षण के तहत भारत में शिक्षा चिकित्सा, तथा निर्माण कार्य का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है।
2-मुफ्त या अत्यधिक कम रेट पर भोजन व्यवस्था। इससे भारत का20% व्यक्ति काम छोड़ चुका है या काम इसलिए करता है क्योंकि उसे नशा करने के लिए पैसा चाहिए।
3-एम,एस,पी -यह योजना भारत को पूरी तरह से बर्बाद करने की योजना है। पंजाब का किसान अच्छी तरह से जानता है। एमएसपी पूरी तरह से लागू होने के बाद विदेश में एक दाना भी अनाज नहीं बेच पाएगा। क्योंकि उसका अनाज विदेश से 5 गुना तक महंगा है। अपने अनाज के दम पर भारतीयों के टैक्स का पैसा कब तक आपका साथ देगा। इससे तो भारत निरंतर टूटता जाएगा।
भारत में कांग्रेस ने आजादी के बाद ऐसी बिहू रचना रची है जिसको तोडे़ बगैर भारत का विकास संभव नहीं है।
यदि आरक्षण समाप्त करते हैं तो आंदोलन। मुफ्त अनाज रोकने पर सरकार गिरने का खतरा।
एमएसपी रेट तय ना करो तो कांग्रेश द्वारा देश जलाने की धमकी। कैसे होगा भारत का विकास ,कैसे बनेगी सोने की चिड़िया ,कैसे भारत का परचम दुनिया पर लहराएगा, हम सबको मिल बैठकर पुनर्विचार करना होगा। क्योंकि मोदी बैठा ही है भारत को विश्व विजय बनाने के लिए किंतु आपका सहयोग मिले तो बिना अड़चन विश्व विजय होगा।
किंतु वर्तमान आंदोलन के लिए सिर्फ किसानों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि उन्हें महंगा बीज महंगी खाद। बिजली पानी आदि अनेक अडचनों से गुजर ना पड़ता है जिसके कारण इस आंदोलन को करने के लिए बाध्य हैं।
इसका दोष पूरी तरह 70 वर्षों से कांग्रेस सरकार को जाता है। हमने 35 वर्ष पूर्व कृषि चक्र पर आधारित लेख लिखा था जो आज भी संग्रहालय में धूल खा रहा है। इसकी एक प्रति महेंद्र सिंह टिकैत को भी लिखी थी जिसका जवाब आज तक नहीं मिला। इस योजना की रूपरेखा थी। प्रत्येक खेती योग्य भूमि पर 15% जगह पर एक तालाब बना दिया जाए, जिस के फायदे अनगिनत है तथा इससे पैदावार की लागत वर्तमान दर से 5% भी नहीं रह जाएगी।
1-खेत को भरपूर पानी मिलेगा तथा पानी के लिए आत्मनिर्भर बनेगा

2-कम बिजली लागत पर यह बिना बिजली( रहट) द्वारा सिंचाई कर सकेगा।

3-तलाव में मछली बदक उत्पादन कर अपनी आमदनी को बढ़ाएगा।

4-तालाब के समीप पशु पालने से दूध मिलेगा तथा उसका गोबर मछली का भोजन बनेगा। मछली की बीट अत्यंत श्रेष्ठ खाद का निर्माण करेगी।

5-तालाव के कारण पक्षियों की संख्या बढ़ेगी जिससे कीट पतंगों के लिए रसायन का उपयोग नहीं करना पड़ेगा

6-अन्य लाभ-

A- बरसात का पानी तालाब में भरने के कारण जल प्लावन की स्थिति नहीं बनेगी

B-नदी वर्ष भर चाहे वह गर्मी सर्दी बरसात हो एक समान बहाव होगा जिससे जनधन की हानी नहीं होगी।

C- इस योजना को पूरे विश्व में लागू किया जाए तो समुद्र से 5से 10% जमीन वापस ली जा सकती है।
70 सालों वाली राष्ट्रद्रोही सरकार ने हमारी कभी नहीं सुनी किंतु उम्मीद करता हूं वर्तमान राष्ट्रवादी सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अवश्य संज्ञान लेंगे।

शरद अग्रवाल

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